स्वामी ब्रह्मानंद का व्यक्तित्व महान था। पहले भगवाधारी, जो संसद पहुंचे, २३ साल की उम्र में लिया संन्यास, जीवन भर कभी पैसों को नहीं छुआ, सांसद होकर भी भिक्षा मांग कर किए भोजन। देश की स्वतंत्रता के लिए उन्होंने जहां स्वयं को समर्पित कर कई आंदोलनों में जेल काटी। स्वामी जी ने शिक्षा के क्षेत्र में बहुत ही कार्य किए। समाज के लोगों को शिक्षा की ओर ध्यान देने का आहवान किया। स्वामी ब्रह्मानंद महाराज का जन्म 04 दिसंबर 1894 को उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले की राठ तहसील के बरहरा नामक गांव में साधारण किसान परिवार में हुआ था।